Wednesday, 7 September 2022

भारत में ई-कॉमर्स व्यवसाय का भविष्य

ई-कॉमर्स क्या है? 

दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स को ही शॉर्ट फॉर्म में ई-कॉमर्स कहा जाता है। यह ऑनलाइन व्यापार करने का एक तरीका है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के द्वारा इंटरनेट के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद-बिक्री की जाती है। जिसमें समय और भूगोलिक स्थिति जैसी बाधाएँ बहुत मायने नहीं रखती ।


ई-कॉमर्स के लाभ:- 

गौरतलब है कि ई-कॉमर्स के ज़रिये सामान सीधे उपभोक्ता को प्राप्त होता है। इससे बिचौलियों की भूमिका तो समाप्त होती ही है, सामान भी सस्ता मिलता है। इससे बाज़ार में भी प्रतिस्पर्द्धा बनी रहती है और ग्राहक बाज़ार में उपलब्ध सामानों की तुलना भी कर पाता है जिसके कारण ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाला सामान मिल पाता है।

एक तरफ ऑनलाइन शॉपिंग में ग्राहकों की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच आसान हो जाती है तो वहीं दूसरी तरफ, ग्राहकों का समय भी बचता है।

चुनौतियाँ:-

गौरतलब है कि ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर कंज्यूमर्स के मन में हमेशा संदेह का भाव बना रहता है कि उन्होंने जो प्रोडक्ट खरीदा है वह सही होगा भी या नहीं। कई बार ऐसी शिकायतें सामने आईं जिनमें कंज्यूमर का कहना था कि उन्होंने जो सामान बुक किया था उसके बदले उन्हें किसी और सामान की डिलीवरी की गई या फिर वह सामान खराब था।

इसी तरह कई बार लोगों की शिकायतें रहती हैं कि अब वे इसके खिलाफ कहाँ शिकायत करें।

एक तरफ, जहाँ इसको लेकर किसी ठोस कानून का अभाव है, तो वहीं दूसरी तरफ, लोगों में जागरूकता की कमी भी दिखती है।

भारत में ई-कॉमर्स का भविष्य :-

आज ई-कॉमर्स एक ऐसा क्रांतिकारी परिवर्तन है जिसके विश्वव्यापी मंच से कम निवेश पर भी कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। अब स्थापित सप्लाई चेन से मुकाबले के लिए डिजिटल क्रांति के जरिए कारोबार और निवेश फायदे का सौदा है। एक सर्वे के मुताबिक, 2020 में ई-कॉमर्स सैक्टर में 8 प्रतिशत और 2021 में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2024 तक इस सैक्टर में कारोबार 111 अरब डॉलर और 2026 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। 2021 में ई-कॉमर्स और संबद्ध उद्योगों (ऑनलाइन फूड बिजनैस, सोशल कॉमर्स, ऑनलाइन किराना) में रोजगार के अवसरों में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

गौरतलब है कि जिस प्रकार भारत सरकार "डिजिटल  इंडिया" कैम्पेन के जरिये देश को डिजिटलाइज़ करने का प्रयास कर रही है वह सराहनीय है और साथ ही इसके परिणाम स्वरूप भारत में ई- कॉमर्स का भविष्य उज्जवल है।

Saturday, 28 July 2018

होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे


बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे
ये पंक्तियाँ दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल पर फिट बैठ रही है  अरविंद केजरीवाल की आप को जब तक नई पहचान नहीं मिली थी तब तक वह सबूतों के पुलिंदे और आम आदमी से सरोकार रखने की वकालत करते थे लेकिन सत्ता का चरित्र ही ऐसा है सत्ता में आने से पहले लोग कहते कुछ हैं और सत्ता में आने के बाद उनके रंग बदल जाते हैं केजरीवाल के साथ भी यही हो रहा है। अण्णा आंदोलन के शुरुवाती दौर में केजरीवाल ने सत्ताधारी नेताओं पर बिना साक्ष्य के गंभीर आरोप लगाकर खूब सनीसनी फैलाई। तब वह प्रेस कांफ्रेंस के आधार पर नेताओं से त्यागपत्र मांगते थे। आज जब वह खुद सत्ता में हैं तो वह अपने रंग बदल चुके हैं दिल्लीवासियों ने बड़ी उम्मीद से आम आदमी पार्टी को प्रचंड बहुमत देकर सत्ता सौंपी लेकिन लगता ऐसा है उपराज्यपाल और केजरीवाल की जंग में ही दिल्ली उलझ कर रह गयी है दिल्ली के विकास में आने वाली प्रत्येक बाधा के लिए वह प्रधानमंत्री और उपराज्यपाल दोनों को जिम्मेदार ठहराते हैं। इस लड़ाई में सबसे ज्यादा नुकसान दिल्ली के लोगों को हो रहा है लेकिन शायद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इससे कोई मतलब नहीं। चूंकि उन्हें कोई तमाशा करना थाइसलिए बीते दिनों भी वह अपने मंत्रियों के साथ सीधे उपराज्यपाल कार्यालय यानी राजनिवास के भीतर धरना देने पर आमादा हुए। दिल्ली उच्च न्यायालय की यह टिप्पणी उचित ही थी कि आखिर मुख्यमंत्री को राजनिवास के अंदर धरने की अनुमति किसने दीआप की सरकार बनने के बाद उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अधिकारों की लड़ाई चल रही है। केन्द्र का वरदहस्त उपराज्यपाल अनिल बैजल पर है। अधिकारों की लड़ाई का ये मामला अनेक बार अदालतों की चौखट तक भी पहुंच चुका है लेकिन दिल्ली में एल जी और केजरीवाल के बीच सत्ता संघर्ष के दौर में दिल्ली हाईकोर्ट ने उपराज्यपाल की सर्वोच्चता को ही वरीयता दी है। एल जी को साधे बिना दिल्ली में कोई भी काम संभव नहीं है क्युकि दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है बेहतर होता केजरीवाल दिल्ली के सी एम के अधिकार और एल जी की सर्वोच्चता के पैमाने को समझते केजरीवाल के साथ सबसे बड़ी परेशानी यह है वह बहुत बड़बोले हैं। केजरीवाल एक चतुर राजनेता हैं। उन्होंने धरना एवं अनशन करके एक साथ जनता की सहानुभूतिकुछ दलों का समर्थन एवं अपना देशव्यापी प्रचार पाने की रणनीति अपनाई। इसका प्रभाव इतना हुआ कि चार मुख्यमंत्री खुलकर उनके पक्ष में आ गए। यह अवसरवादी राजनीति की एक और खराब मिसाल के अलावा और कुछ नहीं। बेहतर यही है कि वे अब भविष्य में इस तरह राजनीति को तमाशा बनाने की प्रवृत्ति से बाज आएं।

Saturday, 26 March 2016

बिजली रानी कहाँ से लानी ??

बिजली विज्ञान की महत्वपूर्ण देन है। विज्ञान के जितने भी अविष्कार है बिजली उनमे से सबसे प्रमुख है, प्रमुख इसलिए भी है क्योंकि विज्ञान की सहायता से बने अधिकतर यंत्र को चलाने के लिए बिजली की ही आवश्यकता पड़ती है जिसका प्रयोग हम दैनिक क्रियाकलाप मे करते हैं। सचमुच विधुत मनुष्य के लिए वरदान है। जिसने घरेलु कार्यो से लेकर औद्योगिक क्षेत्र के सभी कार्यो को आसान बना दिया है परिणामस्वरूप औद्योगिक क्षेत्रो का खुब विकास हुआ।आज विधुत हमारे जीवन का एक ऐसा हिस्सा बन चुका है कि जिसके आभाव में हमारा जीवन अधुरा है  यदि बात करे अपने देश भारत की जो गांव का देश है, आजादी के 68 वर्षों  बाद भी कुछ क्षेत्र ऐसे है जहाँ बिजली का नामो -निशान तक नही है, जहाँ लोग आज भी अपना जीवन अंधकार में व्यतीत करने को मजबुर हैं और बच्चे लालटेन की रौशनी में पढ़ने को बेबस। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के पुरवा विधानसभा के तहत गुलरिहा ग्राम पंचायत, जो मीडीया मे हमेषा बने रहने के लिए अपने वक्तवयों के लिए प्रसिद्व हैं अर्थात श्री साक्षी महाराज का चुनाव क्षेन्न। 

जहाँ आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गुलरिहा पंचायत जो पुरवा विधानसभा की दूसरी सबसे बड़ी पंचायत है, यहाँ की जनसँख्या लगभग 30000  है, बावजूद इसके आज भी यहाँ 32 में से 27 गाँव ऐसे हैं जिनमे बिजली दुर दुर तक दिखाई नही देती जिसकी वजह से लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गाँव के लोगों से बात करने पर पता चला कि उनकी इस समस्या पर गांव के जिम्मेदारो ने कभी ध्यान नही दिया। गुलरिहा पंचायत के पूर्व प्रधान स्वर्गीय श्री उदयवीर जिनका कार्यकाल 32 वर्षो का था उन्होने भी इस गंभीर समस्या पर ध्यान नही दिया। 2014 में उनके निधन के बाद उनके बेटे बलबीर सिंह ने चुनाव जीत कर नवंबर 2014 में अपना कार्यभार संभाला परन्तु लोगो का कहना है कि इतने लम्बे कार्यकाल के बावजूद पूर्व प्रधान की ही तरह उनके बेटे ने भी इस विषय में कोई ठोस कदम नही उठाया। जिससे जनता काफी निराश है और नाराज भी। वहीँ दूसरी तरफ ग्राम पंचायत के प्रधान बलबीर सिंह बतातें है कि 2 जिले -उन्नाव  और रायबरेली दोनों के बॉर्डर पर होने के कारण इस ग्राम पंचायत  का विकास नही हो सका, और प्रधान के कथनानुसार इस ग्राम पंचायत मे बिजली लाने के लिए 39 के.वि का पॉवरप्लांट बनवाया जा रहा है।जहां एक तरफ प्रधान ने इस समस्या का समाधान निकालने में हुई वर्षो (33) की देरी के लिए बजट और प्रधान की आय कम होने को मुख्य कारण बताया वहीं दुसरी तरफ पुरवा विधानसभा के विधायक श्री उदयराज यादव, जो की २० वर्षों से वहां के विधायक हैं ,उनके अनुसार उनके क्षेत्र के किसी भी ग्राम पंचायत या किसी भी गाँव में ऐसी कोई समस्या है ही नही। जबकी जनता का कहना है कि विधायक कभी इस ग्राम पंचायत  में नही आते। इस ग्राम पंचायत के गाँव भीमनगर के निवासी रामचन्द्र कहते है कि अपने 20  वर्ष के कार्यकाल के दौरान विधायक आज तक इस क्षेत्र में कभी नही आये, और प्रधान भी सिर्फ चुनाव के समय पर आते हैं ।गाँव चंदरी खेड़ा के बच्चूलाल तिवारी का भी यही कहना है कि इस गाँव में प्रधान और विधायक एक बार भी नही आये। अमेरिकी ऊर्जा सूचना और प्रशासन के अनुसार भारत ऊर्जा का अधिक उपयोग और खपत करने वाला विश्व का चैथा देश है, और उत्तर प्रदेश उन राज्यों में से एक है जो बिजली की सबसे अधिक खपत करते हैं ! उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जो की सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 880 करोड़ का  निवेश कर रहा है। बावजूद इसके यहाँ के लोग 21 वि सदी में 18 वि सदी की तरह जीने को मजबूर हैं, जो निसंदेह हमारे लिए चिंता का विषय है। एक तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं, देश को डिजिटलाइज करने के लिए बड़ी -बड़ी योजनाएँ चलाई जा रही हैं !तो दुसरी ओर देश के कई क्षेत्रो मे लोग आज भी अंधकार में जीने को मजबूर हैं। यह स्तिथि कहीं और की नही बल्कि उस राज्य की है जहाँ के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि यू.पी से अधिक विकास किसी अन्य राज्य में नही हुआ, उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश ही एक ऐसा राज्य है जहाँ विधार्थियों को 16 लाख लैपटॉप बांटे गए, परन्तु माननीय मुख्यमंत्री को यह भी मालुम होना चाहिए कि लैपटॉप चाहे कितनी भी अच्छी कम्पनी का क्यो ना हो बिना बिजली के एक डब्बे के सिवा और कुछ नही होता। वास्तव मे गुलरिहा ग्राम सभा आईना है केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार के लिए जिसमे देखने पर सरकार के खोखले दावों की सच्चाई साफ नजर आती है जो हमे यह सोचने पर मजबुर कर रही है कि ऐसी स्तिथि में क्या हमारा भारत सचमुच डिजिटल इंडिया बन पाएगा ?

आरक्षण एक अत्याचार ??

यह कैसी विडम्बना यह कैसा अत्याचार है?
जिसने की जी तोड़ पढ़ाई वह बैठा बेकार है
प्रतियोगिता के काल में कोटा क्यों बना दिया?
भारत की महान शिक्षा को छोटा क्यों बना दिया?
यह हमारी कमज़ोरी है या समाज का विकार है?
यह कैसी विडम्बना यह कैसा अत्याचार है?
जिसने की जी तोड़ पढ़ाई वह बैठा बेकार है
रचियता को नहीं मालूम इससे बनाने वाले क्या आकार है..
अंधे हो जाते है नेता जब देखते कुर्शी साकार है
कोटे का होना हमारी स्वतंत्रता पर एक वार है
यह कैसी विडम्बना यह कैसा अत्याचार है?
जिसने की जी तोड़ पढ़ाई वह बैठा बेकार है
युवा वर्ग को कोटा नहीं अवसर मिलना चाहिए
जिसके अंदर क्षमता हो वह आगे बढ़ाना चाहिए
भीख में मिले मौके को लानत है धित्कार है..
यह कैसी विडम्बना यह कैसा अत्याचार है?
जिसने की जी तोड़ पढ़ाई वह बैठा बेकार है...

Wednesday, 23 March 2016

हम भारतवासी

मत लड़ो आपस में नहीं तो बिखर जाओगे,
मोत आने से पहले ही खुद की नजरों में मर जाओगे..
हो भारतवासी तो मीसाल बन कर उभरो दुनिया के लीए.. 
नहीं तो इतीहास के चंद पन्नों में सिमट कर रह जाओगे ।।
।। जय हिन्द ।। जय भारत ।।

हिन्दु मुस्लिम भाई भाई

मैं मुस्लिम हूँ, तू 
हिन्दु है, हैं दोनो 
इंसान... 
ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ,
तू पढ़ ले कुराण, 
अपने तो दिल में है दोस्त,
बस एक ही अरमान,,
एक ही थाली में खाना खाए
सारा हिन्दुस्तान...
# सूरज सिंह #