बिजली विज्ञान की महत्वपूर्ण देन है। विज्ञान के जितने भी अविष्कार है बिजली उनमे से सबसे प्रमुख है, प्रमुख इसलिए भी है क्योंकि विज्ञान की सहायता से बने अधिकतर यंत्र को चलाने के लिए बिजली की ही आवश्यकता पड़ती है। जिसका प्रयोग हम दैनिक क्रियाकलाप मे करते हैं। सचमुच विधुत मनुष्य के लिए वरदान है। जिसने घरेलु कार्यो से लेकर औद्योगिक क्षेत्र के सभी कार्यो को आसान बना दिया है परिणामस्वरूप औद्योगिक क्षेत्रो का खुब विकास हुआ।आज विधुत हमारे जीवन का एक ऐसा हिस्सा बन चुका है कि जिसके आभाव में हमारा जीवन अधुरा है यदि बात करे अपने देश भारत की जो गांव का देश है, आजादी के 68 वर्षों बाद भी कुछ क्षेत्र ऐसे है जहाँ बिजली का नामो -निशान तक नही है, जहाँ लोग आज भी अपना जीवन अंधकार में व्यतीत करने को मजबुर हैं और बच्चे लालटेन की रौशनी में पढ़ने को बेबस। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के पुरवा विधानसभा के तहत गुलरिहा ग्राम पंचायत, जो मीडीया मे हमेषा बने रहने के लिए अपने वक्तवयों के लिए प्रसिद्व हैं अर्थात श्री साक्षी महाराज का चुनाव क्षेन्न।
जहाँ आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गुलरिहा पंचायत जो पुरवा विधानसभा की दूसरी सबसे बड़ी पंचायत है, यहाँ की जनसँख्या लगभग 30000 है, बावजूद इसके आज भी यहाँ 32 में से 27 गाँव ऐसे हैं जिनमे बिजली दुर दुर तक दिखाई नही देती जिसकी वजह से लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गाँव के लोगों से बात करने पर पता चला कि उनकी इस समस्या पर गांव के जिम्मेदारो ने कभी ध्यान नही दिया। गुलरिहा पंचायत के पूर्व प्रधान स्वर्गीय श्री उदयवीर जिनका कार्यकाल 32 वर्षो का था उन्होने भी इस गंभीर समस्या पर ध्यान नही दिया। 2014 में उनके निधन के बाद उनके बेटे बलबीर सिंह ने चुनाव जीत कर नवंबर 2014 में अपना कार्यभार संभाला परन्तु लोगो का कहना है कि इतने लम्बे कार्यकाल के बावजूद पूर्व प्रधान की ही तरह उनके बेटे ने भी इस विषय में कोई ठोस कदम नही उठाया। जिससे जनता काफी निराश है और नाराज भी। वहीँ दूसरी तरफ ग्राम पंचायत के प्रधान बलबीर सिंह बतातें है कि 2 जिले -उन्नाव और रायबरेली दोनों के बॉर्डर पर होने के कारण इस ग्राम पंचायत का विकास नही हो सका, और प्रधान के कथनानुसार इस ग्राम पंचायत मे बिजली लाने के लिए 39 के.वि का पॉवरप्लांट बनवाया जा रहा है।जहां एक तरफ प्रधान ने इस समस्या का समाधान निकालने में हुई वर्षो (33) की देरी के लिए बजट और प्रधान की आय कम होने को मुख्य कारण बताया वहीं दुसरी तरफ पुरवा विधानसभा के विधायक श्री उदयराज यादव, जो की २० वर्षों से वहां के विधायक हैं ,उनके अनुसार उनके क्षेत्र के किसी भी ग्राम पंचायत या किसी भी गाँव में ऐसी कोई समस्या है ही नही। जबकी जनता का कहना है कि विधायक कभी इस ग्राम पंचायत में नही आते। इस ग्राम पंचायत के गाँव भीमनगर के निवासी रामचन्द्र कहते है कि अपने 20 वर्ष के कार्यकाल के दौरान विधायक आज तक इस क्षेत्र में कभी नही आये, और प्रधान भी सिर्फ चुनाव के समय पर आते हैं ।गाँव चंदरी खेड़ा के बच्चूलाल तिवारी का भी यही कहना है कि इस गाँव में प्रधान और विधायक एक बार भी नही आये। अमेरिकी ऊर्जा सूचना और प्रशासन के अनुसार भारत ऊर्जा का अधिक उपयोग और खपत करने वाला विश्व का चैथा देश है, और उत्तर प्रदेश उन राज्यों में से एक है जो बिजली की सबसे अधिक खपत करते हैं ! उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जो की सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 880 करोड़ का निवेश कर रहा है। बावजूद इसके यहाँ के लोग 21 वि सदी में 18 वि सदी की तरह जीने को मजबूर हैं, जो निसंदेह हमारे लिए चिंता का विषय है। एक तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं, देश को डिजिटलाइज करने के लिए बड़ी -बड़ी योजनाएँ चलाई जा रही हैं !तो दुसरी ओर देश के कई क्षेत्रो मे लोग आज भी अंधकार में जीने को मजबूर हैं। यह स्तिथि कहीं और की नही बल्कि उस राज्य की है जहाँ के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि यू.पी से अधिक विकास किसी अन्य राज्य में नही हुआ, उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश ही एक ऐसा राज्य है जहाँ विधार्थियों को 16 लाख लैपटॉप बांटे गए, परन्तु माननीय मुख्यमंत्री को यह भी मालुम होना चाहिए कि लैपटॉप चाहे कितनी भी अच्छी कम्पनी का क्यो ना हो बिना बिजली के एक डब्बे के सिवा और कुछ नही होता। वास्तव मे गुलरिहा ग्राम सभा आईना है केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार के लिए जिसमे देखने पर सरकार के खोखले दावों की सच्चाई साफ नजर आती है जो हमे यह सोचने पर मजबुर कर रही है कि ऐसी स्तिथि में क्या हमारा भारत सचमुच डिजिटल इंडिया बन पाएगा ?

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