ई-कॉमर्स क्या है?
दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स को ही शॉर्ट फॉर्म में ई-कॉमर्स कहा जाता है। यह ऑनलाइन व्यापार करने का एक तरीका है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के द्वारा इंटरनेट के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद-बिक्री की जाती है। जिसमें समय और भूगोलिक स्थिति जैसी बाधाएँ बहुत मायने नहीं रखती ।
ई-कॉमर्स के लाभ:-
गौरतलब है कि ई-कॉमर्स के ज़रिये सामान सीधे उपभोक्ता को प्राप्त होता है। इससे बिचौलियों की भूमिका तो समाप्त होती ही है, सामान भी सस्ता मिलता है। इससे बाज़ार में भी प्रतिस्पर्द्धा बनी रहती है और ग्राहक बाज़ार में उपलब्ध सामानों की तुलना भी कर पाता है जिसके कारण ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाला सामान मिल पाता है।
एक तरफ ऑनलाइन शॉपिंग में ग्राहकों की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच आसान हो जाती है तो वहीं दूसरी तरफ, ग्राहकों का समय भी बचता है।
चुनौतियाँ:-
गौरतलब है कि ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर कंज्यूमर्स के मन में हमेशा संदेह का भाव बना रहता है कि उन्होंने जो प्रोडक्ट खरीदा है वह सही होगा भी या नहीं। कई बार ऐसी शिकायतें सामने आईं जिनमें कंज्यूमर का कहना था कि उन्होंने जो सामान बुक किया था उसके बदले उन्हें किसी और सामान की डिलीवरी की गई या फिर वह सामान खराब था।
इसी तरह कई बार लोगों की शिकायतें रहती हैं कि अब वे इसके खिलाफ कहाँ शिकायत करें।
एक तरफ, जहाँ इसको लेकर किसी ठोस कानून का अभाव है, तो वहीं दूसरी तरफ, लोगों में जागरूकता की कमी भी दिखती है।
भारत में ई-कॉमर्स का भविष्य :-
आज ई-कॉमर्स एक ऐसा क्रांतिकारी परिवर्तन है जिसके विश्वव्यापी मंच से कम निवेश पर भी कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। अब स्थापित सप्लाई चेन से मुकाबले के लिए डिजिटल क्रांति के जरिए कारोबार और निवेश फायदे का सौदा है। एक सर्वे के मुताबिक, 2020 में ई-कॉमर्स सैक्टर में 8 प्रतिशत और 2021 में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2024 तक इस सैक्टर में कारोबार 111 अरब डॉलर और 2026 तक 200 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। 2021 में ई-कॉमर्स और संबद्ध उद्योगों (ऑनलाइन फूड बिजनैस, सोशल कॉमर्स, ऑनलाइन किराना) में रोजगार के अवसरों में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
गौरतलब है कि जिस प्रकार भारत सरकार "डिजिटल इंडिया" कैम्पेन के जरिये देश को डिजिटलाइज़ करने का प्रयास कर रही है वह सराहनीय है और साथ ही इसके परिणाम स्वरूप भारत में ई- कॉमर्स का भविष्य उज्जवल है।
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